मध्य प्रदेश के सतपुड़ा पहाड़ियों से घिरा छिंदवाड़ा जिला जो प्रदेश के क्षेत्रफल अनुसार सबसे बड़ा जिला है। इस जिले के परासिया विधानसभा में स्थित गौमुख मेला एक प्राचीन धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव है, जो जमुनिया जेठू ग्राम पंचायत के उमरेठ क्षेत्र में आयोजित होता है। यह मेला गाय के मुख से निरंतर बहने वाली पवित्र जलधारा के चमत्कार के लिए विख्यात है, जो भक्तों को आकर्षित करता है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर 10-15 दिनों तक चलने वाला यह मेला स्थानीय लोक संस्कृति, भक्ति और पर्यटन का संगम है।
बचपन मे हर साल पिताजी के साथ यह मेला घूमने का अवसर मिलता था। जहाँ गौमुख से बहता पानी और भी आकर्षित करता था। कई वर्षो बाद जब वापस गौमुख मेले में पहुँचा, तो अतीत की अनेकों छवियां वापस से ताज़ा हो गयी। खिलौने और मिठाइयों की दुकानों ने बचपन की झलक दिखा दी।
गौमुख मेला एक बहुत पुराने मंदिर के समीप लगता है और इस मेले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां प्राचीन शिवलिंग, नंदी प्रतिमा, कार्तिकेय भगवान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां विद्यमान हैं जिन्हें कई सौ वर्ष पूर्व पत्थरों में गढ़ा गया है।

कुछ स्थानीय लोगो की मान्यता अनुसार यह जलधारा कभी सूखती नहीं और स्नान करने से रोग निवारण होता है। परासिया तहसील के निकट होने से हजारों श्रद्धालु परासिया, छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचते हैं। गौमुख मेले तक पहुँचने के लिए डामर रोड का सुगम मार्ग है जिसके जरिये श्रद्धालु इस दुर्गम स्थान पर पहुँचते है।
मेला का इतिहास और किंवदंतियां
गौमुख मेले का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है। स्थानीय कथाओं के अनुसार, एक गाय के मुख से जल निकलने की घटना भगवान शिव की कृपा से हुई, जो जेठू नामक गोप के धार्मिक भक्ति का फल थी। जमुनिया जेठू का नाम इसी जेठू से पड़ा। पुरातात्विक अवशेष बताते हैं कि यह स्थान प्राचीन काल से तीर्थस्थल रहा है। यहाँ स्थित मंदिर और उसकी मूर्तियां बहुत पुरानी होने के कारण अपने पुरातत्व इतिहास का वर्णन करती है।
जिस गौमुख आकृति के कारण यह क्षेत्र चर्चाओं में रहता है उसके नीचे चट्टानों के अंदर, गौमुख झरने के पीछे भी भगवान शिव की एक मूर्ति विराजमान हैं जिसे देख ऐसा लगता है कि गौमुख माता के मुँख से निकलने वाले जल से भगवान शिव का अभिषेक हो रहा हो।

पिछले वर्षों में मेला कम उत्साही रहा, लेकिन 2025 में फिर से जोश लौट आया। जलधारा का चमत्कार आज भी लोगों को हैरान करता है। यह मेला न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है, जहां विभिन्न तरह के लोग एकत्र होते हैं।
मेला स्थल का वर्णन
जमुनिया जेठू गौमुख मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा है। मंदिर परिसर में गाय के मुखाकार चट्टान से जल बहता है, जो एक छोटे जलाशय में गिरता है। आसपास हरी-भरी पहाड़ियां, वन और नदियां पर्यटकों को लुभाती हैं। मंदिर में भगवान शंकर की पिंडी और अन्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। पहुंचने के लिए परासिया से 10-15 किमी की दूरी है, जहां सड़क मार्ग सुगम है। मेले के दौरान स्टॉल्स, झूलों, अन्य तरह के सामानों की दुकानें और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से क्षेत्र की चमक बढ़ जाती है। देव पूजा और भजन-कीर्तन मेले के समय क्षेत्र के मुख्य आकर्षणों में से एक होते हैं।
प्राचीन लोककथा और कहानियां।
गौमुख मेले में कई तरह की कहानियां भी सुनने को प्राप्त होती है। स्थानीय लोग और हर वर्ष मेले में अपनी दुकान लगाने वाले बताते है कि इस स्थान पर एक बड़े नाग-नागिन का जोड़ा रहता है। इस जोड़े को देखने वालों की माने तो यह नाग-नागिन का जोड़ा किसी को हानि नही पहुँचाता। यह जोड़ा सिर्फ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए कई वर्षो से वह मौजूद है जो समय-समय पर सिर्फ कुछ लोगो को ही अपने दर्शन देता है।
कैसे पहुंचें और घूमें गौमुख मेला धाम
सबसे नज़दीक परासिया रेलवे स्टेशन है जहाँ से ऑटो, टैक्सी या निजी वाहन उपलब्ध हो जाएंगे। अगर आप निजी वाहन से आते है तो पहले जमुनिया जेठू आकर मेले तक पहुँच सकते है। रुकने की व्यवस्था के लिए परासिया सबसे नजदीक और उत्तम क्षेत्र है जहाँ स्थानीय धर्मशालाएं और होटल आराम से मिल जाएंगे।
सर्वश्रेष्ठ समय की बात करे तो यह मेला साल भर में मात्र 10 से 15 दिनों के लिए कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर) में भरता है। सुबह लगभग 10 बजे से श्रद्वालुओं का आना प्रारम्भ हो जाता है और मेले में चहल-पहल रात 10 बजे तक रहती है ।
सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियां
मेले में गौमुख जल धारा के नीचे लोग स्नान करते है और मंदिर में पूजा-अर्चना एवम रुद्राभिषेक करते है। इसके साथ मेले में निम्नलिखित प्रमुख आयोजन होते हैं जैसे कई तरह की दुकानें लगती जिसमे हस्तशिल्प, मिट्टी के सामान, स्थानीय मिठाईयों के स्टाल आदि का आनंद मिलता है।
यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, किसानों और कारीगरों को बाजार प्रदान करता है।
पर्यटन और आस्था का संगम गौमुख मेला धार्मिक पर्यटन का उत्तम उदाहरण है। प्रकृति प्रेमी यहां ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का आनंद ले सकते हैं। मेले को कई दशक गुजर गए मगर इसकी रौनक आज भी वैसी की वैसी ही है। जहाँ युवा पीढ़ी भी आध्यात्म , रोमांच और इंस्टाग्राम रील्स के लिए इस पावन गौमुख धाम में आती है। गौमुख मेला आस्था, संस्कृति और प्रकृति का अनोखा मेल है। इस स्थान में मौजूद कई सारी चीजों का इतिहास इतना पुराना है कि उसके बारे में ज़्यादा जानकारी किसी के पास नही है। क्योंकि सनातन धर्म जैसे ही यह मेला अनंत काल से चलता आ रहा है।
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