अगर आप भारतीय हैं, तो आपने अपने जीवन में कभी न कभी पंडित बाबूलाल चतुर्वेदी पंचांग या लाला राम स्वरूप कैलेंडर ज़रूर देखा होगा। मध्य प्रदेश, उत्तर भारत और आसपास के राज्यों में यह कैलेंडर आज भी लाखों घरों में उपयोग होता है। इस कैलेंडर को एकादशी का व्रत, पंचांग संबंधित जानकारी एवं शुभ मुहूर्त देखने के लिए उपयोग किया जाता है।
हालांकि घर के अलावा तारीख देखने के लिए हम अपने फ़ोन और कंप्यूटर में कैलेंडर को देख लेते है। इसी कैलेंडर को हम सरकारी एवम निजी जीवन मे भी उपयोग करते है। इस कैलेंडर को अंग्रेजी कैलेंडर या Gregorian Calendar भी कहते है। यह सबसे ज़्यादा उपयोग होने वाला कैलेंडर है मगर इसका उपयोग बहुत सीमित है।
सिर्फ़ Date और Day बताना। लेकिन हिंदू कैलेंडर सिर्फ तारीख देखने का साधन नहीं, बल्कि एक पूर्ण जीवन-प्रबंधन प्रणाली है।
हिंदू कैलेंडर क्यों “जटिल ” लगता है?
सच यह है कि हिंदू पंचांग में मौजूद चीज़ें जटिल नहीं हैं, बल्कि यह हमें किसी ने कभी समझाया ही नही है।
इस कैलेंडर में मिलता है: वर्ष (Year), मास (Month), तिथि (Date), पक्ष (Moon Phase), नक्षत्र, योग
अगर एक बार ये सिस्टम समझ में आ जाए, तो यह जीवन भर आपके साथ रहता है।
Gregorian Calendar बनाम Hindu Calendar
Gregorian Calendar
Gregorian Calendar केवल Sun Movement पर आधारित। Linear सिस्टम (1, 2, 3…)
यह प्रकृति और मानव मस्तिष्क के तालमेल के बारे में बात नही करता।
हिन्दू कैलेंडर
वही हिन्दू कैलेंडर सूर्य, चंद्रमा, प्रकृति और मानव मस्तिष्क के साथ तालमेल बिठाकर, उत्तम अवस्था को प्राप्त करने का एक साधन हैं।
यह एक Dynamic सिस्टम है जो मन, शरीर और भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
चंद्रमा का समुद्र की लहरों पर विशेष प्रभाव देखने को मिलता है। विज्ञान अनुसार भी हमारे शरीर में 70 प्रतिशत हिस्सा पानी का है। इसी कारणवश चंद्रमा के स्थान परिवर्तन का असर हमारी नींद, मूड और भावनाओं पर पड़ता है और यह आज मेडिकल साइंस भी मानता है।
यह कैलेंडर आज भी भारत और नेपाल में मुहूर्त और शुभ समय के लिए प्रयोग होता है।
Gregorian Months की सच्चाई जो कम लोग जानते हैं
September = सप्तम (7)
October = अष्टम (8)
November = नवम (9)
December = दशम (10)
नाम अनुसार इन महीनों को तो सातवें, आठवें, नवमें और दसवें स्थान पर होना था लेकिन आज ये 9वां, 10वां, 11वां और 12वां महीना क्यों हैं?
क्योंकि हिंदू नववर्ष चैत्र से शुरू होता है जो मार्च और अप्रैल के बीच मे आता है न कि जनवरी में। अगर चैत्र मास से देखे तो यह इन महीनो के नाम व संख्या एक जैसी ही है।
विक्रम संवत: भारत का प्राचीन कैलेंडर
हिंदू कैलेंडर को विक्रम संवत कहा जाता है।
इसकी शुरुआत 57 ईसा पूर्व सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शंको पर विजय के बाद उज्जैन से हुई थी। पूर्व में उज्जैन को विश्व की समय की राजधानी भी कहा जाता था।
यह Gregorian Calendar से 57 वर्ष आगे चलता है। इस हिसाब से अभी 2026 AD है और विक्रम संवत 2082 है। चैत्र माह में हिन्दू नववर्ष शुरू होगा तो तब से विक्रम संवत 2083 प्रारंभ हो जाएगा।
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हिंदू महीनों (मास) को सरल भाषा में समझिए

तिथि, पक्ष और चंद्रमा का विज्ञान
एक मास को दो भागों में बाँटा जाता है: शुक्ल पक्ष जब चंद्रमा बढ़ता है, कृष्ण पक्ष जब चंद्रमा घटता है।
प्रत्येक पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं:
प्रतिपदा
द्वितीया
तृतीया
चतुर्थी
…
एकादशी
पूर्णिमा / अमावस्या
पूर्णिमा: शुक्लपक्ष की 15वी तिथि जब ऊर्जा चरम पर होती है और चंद्रमा अपने पूर्ण स्वरूप में होता हैं।
अमावस्या: कृष्णपक्ष की 15वी तिथि जब चंद्रमा आकाश से गायब हो जाता है और घोर अंधियारी रात होती है। यह दिन आत्मचिंतन और शांति के लिये उपयुक्त होता है।
क्यों हमारे त्यौहारों की तारीख बदलती रहती है?
क्योंकि हिंदू कैलेंडर Moon Cycle पर चलता है इसीलिए कभी अधिकमास आता है। हमारे सनातन धर्म के त्योहार प्रकृति के साथ तालमेल बिठाए रहते हैं।
हमारे पर्व मात्र किसी दिन तक सीमित नही रहते, बल्कि वैज्ञानिक रूप से निर्धारित होते हैं। मगर जब हम अपनी तिथियों के अनुसार Gregorian कैलेंडर में दिनांक निकालते है तो यह हर वर्ष किसी दूसरी तारीख पर बदल जाते है।
हिंदू कैलेंडर: एक Life Management Tool
हमारे पूर्वज कैलेंडर को मात्र दिनांक देखने तक नही बल्कि उसे एक जीवन प्रबंधन टूल की तरह उपयोग करते थे। उनके लिए यह एक अनुशासन उपकरण, ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली और मानसिक संतुलन गाइड हुआ करता था।
आज हम इसे सिर्फ reminder समझते हैं, यहीं गलती है।
हिंदू कैलेंडर पुराना नहीं है, हम उससे कट गए हैं। जब हम इसे समझते हैं, तो जीवन ज्यादा संतुलित, शांत और अनुशासित हो जाता है। यह हमारी विरासत है जिसे हमें समझकर, इसका ज्ञान और उपयोग अगली पीढ़ी तक पहुँचना आवश्क है।
