परासिया, 14 जुलाई 2026: आगामी 17 जुलाई को परासिया के इतिहास में पहली बार आयोजित होने जा रही इस्कॉन भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा (ISKCON Jagannath Rath Yatra Parasia) को लेकर एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने पूरे छिंदवाड़ा जिले के श्रद्धालुओं में कौतूहल और श्रद्धा को चरम पर पहुँचा दिया है。 चांदामेटा से प्रारंभ होकर परासिया शिव मंदिर तक जाने वाली इस यात्रा में जो विग्रह (मूर्तियाँ) शामिल हो रही हैं, वे कोई साधारण मूर्तियाँ नहीं हैं। भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलदेव और बहन सुभद्रा महारानी के ये अलौकिक विग्रह सीधे महाप्रभु की मूल लीला स्थली, श्री जगन्नाथ पुरी धाम से विशेष रूप से निर्मित कराकर लाए गए हैं।
जगन्नाथ पुरी का वो रहस्य: धड़कता है भगवान का हृदय?
सनातन परंपरा और पुरी धाम की मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीला संवरण की थी, तब उनके भौतिक शरीर का एक हिस्सा—उनका हृदय (जिसे ‘ब्रह्म पदार्थ’ कहा जाता है)—अग्नि में भी नहीं जला था। आज भी पुरी धाम में हर 12 वर्ष में जब ‘नवकलेवर’ (विग्रह बदलने की प्रक्रिया) होता है, तब इस महा-रहस्यमयी ‘ब्रह्म पदार्थ’ को पुरानी मूर्ति से निकालकर नई मूर्ति में स्थापित किया जाता है।
परासिया आ रहे इन विग्रहों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें पुरी धाम के उन्हीं पारंपरिक शिल्पकारों द्वारा तैयार किया गया है जो मूल मूर्तियों का निर्माण करते हैं। इन विग्रहों को पुरी धाम के मुख्य मंदिर और महाप्रभु के मूल विग्रहों के सानिध्य में रखकर, शास्त्रों के अनुसार स्पर्श कराकर और विशेष अनुष्ठानों के बाद ही छिंदवाड़ा लाया गया है। यही कारण है कि इन मूर्तियों की आध्यात्मिक ऊर्जा बेहद अलौकिक है।
छिंदवाड़ा आगमन पर हुआ था भव्य महा-अभिषेक
जब पुरी धाम से इन दिव्य विग्रहों का आगमन छिंदवाड़ा में हुआ, तब इस्कॉन (ISKCON) परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका भव्य महा-अभिषेक संपन्न किया गया था। पवित्र नदियों के जल, पंचामृत और दुर्लभ जड़ी-बूटियों से हुए इस अभिषेक के बाद से ही इन विग्रहों की सेवा लगातार चल रही है। अब 17 जुलाई को यही परम पावन विग्रह परासिया की सड़कों पर भक्तों को दर्शन देने उतरेंगे।
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छिंदवाड़ा इस्कॉन मंदिर में होंगे स्थायी रूप से स्थापित
परासिया की इस ऐतिहासिक रथ यात्रा के संपन्न होने के बाद, इन तीनों परम पवित्र विग्रहों को छिंदवाड़ा के नवनिर्मित इस्कॉन मंदिर में पूर्ण विधि-विधान के साथ स्थायी रूप से स्थापित (विराजमान) किया जाएगा। यानी परासिया वासियों के पास 17 जुलाई को इतिहास का हिस्सा बनने और सीधे पुरी धाम की ऊर्जा से जुड़े इन विग्रहों के सामने अपनी मनोकामना रखने का यह एकमात्र और सबसे अनमोल अवसर है।
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पल-पल की सेवा में जुटी ‘भारत की वाणी’ और इस्कॉन की टीम
इस भव्य आयोजन की पवित्रता और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पृष्ठभूमि में एक बड़ी टीम दिन-रात काम कर रही है। इस्कॉन के समर्पित वालंटियर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संस्कृति और विचार मंच ‘भारत की वाणी’ के सदस्य भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में लगातार सक्रिय हैं। रूट की मैपिंग से लेकर श्रद्धालुओं की सहूलियत तक, यह संयुक्त टीम सुनिश्चित कर रही है कि परासिया आने वाले हर भक्त को भगवान के सुलभ और दिव्य दर्शन हो सकें।
सर्वसमाज करेगा कदम-कदम पर स्वागत
इस ऐतिहासिक रथ यात्रा का स्वागत करने के लिए परासिया का कोना-कोना आतुर है। नगर के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भगवान के स्वागत की अभूतपूर्व तैयारियाँ की हैं। यात्रा मार्ग में जगह-जगह कलार समाज, राजपूत समाज और ब्राह्मण समाज सहित नगर के विभिन्न समाजों और व्यापारिक संघों द्वारा पुष्प वर्षा, आरती और शीतल जल-शरबत की व्यवस्था के साथ भव्य स्वागत मंच तैयार किए जा रहे हैं。
अगर आप पुरी धाम जाकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन नहीं कर पाए हैं, तो स्वयं महाप्रभु पुरी की पूरी दिव्यता और आशीर्वाद लेकर 17 जुलाई, शुक्रवार को दोपहर ठीक 1:00 बजे चांदामेटा (सिंहवाहिनी दुर्गा मंदिर) आ रहे हैं। इस दुर्लभ और जीवन बदलने वाले अवसर को हाथ से न जाने दें। परिवार सहित रथ की डोरी खींचने जरूर पहुँचें।

