Parasia-jagannath-rath-yatra-2026-photos

परासिया (छिंदवाड़ा), 18 जुलाई 2026: कोयलांचल क्षेत्र परासिया और चांदामेटा के इतिहास में 17 जुलाई का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। इस्कॉन एवं भारत की वाणी द्वारा आयोजित पहली भव्य परासिया जगन्नाथ रथ यात्रा न केवल अभूतपूर्व रूप से सफल रही, बल्कि इसने आस्था और सामाजिक समरसता का एक ऐसा उदाहरण पेश किया जिसे आने वाले वर्षों तक याद रखा जाएगा। पूरी यात्रा के दौरान सड़कों पर 5,000 से 6,000 श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं की उपस्थिति बहुत भारी संख्या में देखने को मिली।

मौसम का बदला मिजाज: भक्तों ने कहा ‘महाप्रभु का चमत्कार’

रथ यात्रा से ठीक एक दिन पहले, यानी 16 जुलाई तक, पूरा क्षेत्र भीषण उमस और चुभती गर्मी से परेशान था। लेकिन जैसे ही 17 जुलाई को रथ यात्रा का दिन आया, आसमान में बादल छा गए और रिमझिम बारिश शुरू हो गई। इस सुहावने मौसम ने श्रद्धालुओं के उत्साह को चार गुना कर दिया। कड़कती धूप की जगह अमृत की तरह बरसती बूंदों के बीच भक्तों ने इसे सीधे भगवान जगन्नाथ का साक्षात चमत्कार और आशीर्वाद कहा।

भारी संख्या में महिलाओं ने यात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ के भजन में नृत्य करते हुए यात्रा की भव्यता को बढ़ाया।

पुरी धाम के विग्रह और श्रील प्रभुपाद जी की ‘सजीव’ मूर्ति

Jagannath-rath-yatra-parasia-Rath-Photo
रथ पर प्रभु पाद जी की मूर्ति पूर्णता जीवित लग थीं।

छिंदवाड़ा से परासिया पहुँचे इस्कॉन के स्वयंसेवकों ने ताजे गेंदे और गुलाब के फूलों से विशाल हाइड्रोलिक रथ का अलौकिक श्रृंगार किया था। रथ पर सीधे उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी धाम से निर्मित होकर आए भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा महारानी और बलदेव महाराज के दिव्य विग्रह विराजमान थे।

इस रथ का सबसे बड़ा आकर्षण इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद जी की बैठी हुई सजीव मूर्ति थी। मूर्ति इतनी वास्तविक और सजीव लग रही थी कि पहली नज़र में सैकड़ों लोग धोखा खा गए। कई श्रद्धालुओं को लगा कि रथ पर कोई महान साधु साक्षात बैठे हैं।

सर्वसमाज ने पलकें बिछाकर किया परासिया जगन्नाथ रथ यात्रा का स्वागत

Parasia-Jagannath-Rath-Yatra-crowd
भक्तो ने जगन्नाथ रथ को खींचकर कमाया पुण्य

चांदामेटा के प्रसिद्ध श्री सिंहवाहिनी दुर्गा मंदिर में पहली महा-आरती के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर नगर के कई गणमान्य नागरिक और विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रभु की डोरी खींचने पहुँचे। इसके बाद रथ यात्रा मंगली बाज़ार, साईं मंदिर, जी.एम. ऑफिस, अंबेडकर चौराहा और गुरुद्वारा होते हुए आगे बढ़ी।

मार्ग में स्वागत की शुरुआत चांदामेटा से ही हो गई थी, जिसके बाद कदम-कदम पर विभिन्न समाजों ने दिल खोलकर भगवान की अगवानी की: नगर पंचायत चांदामेटा अध्यक्ष गोविंद बिजोलिया जी द्वारा स्वागत की बेला प्रारम्भ हुई जो आगे चलकर जत्ती हनुमान मंदिर, वाटिका, 20 नंबर, श्री राम जन्मोत्सव समिति, श्रीवास्तव परिवार, परमार परिवार, आराध्या डेली नीड्स, संस्कार मोबाइल, बसंत मालवी जी की समिति, दुर्गा उत्सव समिति, अधिवक्ता संघ, स्वर्णकार समाज, वीर बहादुर परिवार, कलार समाज, क्लब के सामने: ब्राह्मण समाज, राजपूत-क्षत्रिय समाज, सुधीर यादव परिवार, थाने के समीप स्थानीय व्यापारियों, चंडोक परिवार, राहुल मेडिकल, पंजाबी समाज, हिन्दू उत्सव समिति, रंग जी स्वीट्स समेत शहर के लोगो ने भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया।

यह भी पढ़े: साधारण नहीं है परासिया आने वाली भगवान जगन्नाथ की मूर्ति, पुरी से जुड़े हैं इसके अद्भुत रहस्य

भक्ति में डूबा ‘भारत की वाणी’ का सेवा भाव

रथ खींचते हुए भारत की वाणी के फाउंडर और साथी

चौकी मोहल्ला स्थित हनुमान मंदिर से टर्न लेकर यह भव्य यात्रा अपने अंतिम पड़ाव श्री शिव मंदिर, परासिया पहुँचे। इस पूरी 7 से 8 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान ‘भारत की वाणी’  की टीम के सदस्य और अन्य समर्पित भक्त पूरी तरह नंगे पैर चले। युवाओं ने हाथों में छाले की परवाह किए बिना पूरी श्रद्धा से भारी रस्से को खींचकर रथ को आगे बढ़ाया और मार्ग में व्यवस्थाएं संभालीं।

56 भोग, कन्या नृत्य और विशाल भंडारा

श्री शिव मंदिर में विग्रहों के प्रवेश के समय हजारों लोगों ने कतारबद्ध होकर अंतिम दर्शन और आशीर्वाद लिया। यहाँ भगवान को 56 भोग लगाया गया, जिसके बाद छोटी-छोटी कन्याओं ने भक्ति भजनों पर बेहद सुंदर और भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। महा-आरती के बाद विशाल भंडारे की शुरुआत हुई, जिसमें देर रात तक हजारों लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ चने-आलू की सब्जी, पूड़ी, हलवा और चावल की खिचड़ी का महाप्रसाद ग्रहण किया।

परासिया और चांदामेटा की जनता के निस्वार्थ सहयोग, सहयोगियों की दिन-रात की मेहनत और जगन्नाथ की भक्ति के कारण यह आयोजन क्षेत्र के इतिहास का सबसे बड़ा धार्मिक पर्व बन गया। जय जगन्नाथ!

अपनी बोध: सनातन धर्म ज्ञान पत्रिका यहाँ प्राप्त करे।

By Mayank Dubey

मयंक एक बहुआयामी लेखक, विचारशील कंटेंट क्रिएटर और युवा विचारक हैं एवं "मन की कलम" नामक हिंदी कविता संग्रह के प्रकाशित लेखक हैं। वे धर्म, भारतीय संस्कृति, भू-राजनीति और अध्यात्म जैसे विषयों में भी लिखते है। अपने यूट्यूब चैनल और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए वे समय-समय पर समाज, सनातन संस्कृति और आत्मविकास से जुड़े विचार प्रस्तुत करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *