परासिया (छिंदवाड़ा), 17 जुलाई 2026: आज के दिन का पूरे कोयलांचल क्षेत्र को महीनों से इंतजार था। आज दोपहर ठीक 1:00 बजे से चांदामेटा के श्री सिंहवाहिनी दुर्गा मंदिर से परासिया-चांदामेटा की पहली भव्य परासिया जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra Parasia 2026) शुरू होने जा रही है। भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा जी जिस दिव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे, वह अपनी अनूठी विशेषताओं और आधुनिक तकनीक के कारण पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आइए जानते हैं आज परासिया की सड़कों पर दौड़ने वाले इस रथ में क्या कुछ खास है।
आधुनिक हाइड्रोलिक तकनीक से लैस है यह नया रथ
जैसा कि आप तस्वीरों में देख सकते हैं, इस विशेष रथ को एक बड़े और मजबूत व्हीकल (ट्रक) बेस पर बेहद खूबसूरती से निर्मित किया गया है।
25 फीट ऊंची हाइड्रोलिक प्रणाली: इस रथ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक अत्याधुनिक हाइड्रोलिक सिस्टम लगाया गया है। इस तकनीक की मदद से रथ की ऊंचाई को आवश्यकतानुसार 25 फीट या अधिक ऊपर तक ले जाया जा सकता है।
तारों और बाधाओं से सुरक्षा: मार्ग में आने वाले बिजली के तारों, स्वागत द्वारों या पेड़ों की डालियों के अनुसार इस रथ की ऊंचाई को तुरंत कम या ज्यादा किया जा सकेगा। यह तकनीक न केवल सुरक्षा के लिहाज से बेजोड़ है, बल्कि इससे दूर से खड़े श्रद्धालुओं को भी प्रभु के स्पष्ट और दिव्य दर्शन हो सकेंगे।
अलौकिक श्रृंगार: रथ को पीले और सुनहरे रंगों की आकर्षक कलाकृतियों, चमकीले पर्दों और ताजे गेंदे व गुलाब के फूलों की लंबी लताओं से बेहद भव्य रूप दिया गया है।
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श्रद्धालुओं के लिए विशेष और मजबूत ‘महा-रस्सा’
भगवान के इस विशाल रथ को खींचने के लिए इस्कॉन द्वारा विशेष रूप से बेहद मजबूत और भारी रस्से (रस्सी) की व्यवस्था की गई है। सनातन परंपरा में मान्यता है कि इस रस्से को थामकर रथ खींचने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। आज परासिया के हजारों श्रद्धालु एक साथ मिलकर इसी रस्से के सहारे महाप्रभु के रथ को आगे बढ़ाएंगे।
आधी रात को जब थम गई थी दुनिया, तब जाग रहे थे ये सेवादार

इस भव्य रथ को सुरक्षित रूप से परासिया पहुँचाने और आज के बड़े आयोजन को बिना किसी रुकावट के शुरू करने के लिए कल देर रात तक जमीन पर एक बड़ा अभियान चलाया गया। रथ के साथ दूर-दूर से आए इस्कॉन के मुख्य वालंटियर्स और व्यवस्थापकों के रुकने की उत्तम व्यवस्था और इस विशाल हाइड्रोलिक वाहन की सुरक्षित पार्किंग सुनिश्चित करने के लिए ‘भारत की वाणी’ (bharatkivaani.com) की टीम और इस्कॉन के स्थानीय स्वयंसेवकों ने आधी रात तक मोर्चा संभाला। जब पूरा शहर सो रहा था, तब ये युवा सड़कों पर खड़े रहकर हर एक व्यवस्था को चाक-चौबंद कर रहे थे, ताकि आज सुबह परासिया वासियों को एक निर्बाध और दिव्य उत्सव का अनुभव मिल सके।
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दौड़ें चले आएं… समय याद रखें!
रथ पूरी तरह सज-धज कर तैयार है। महाप्रभु की कृपा पाने का यह दुर्लभ अवसर आपके शहर में सिर्फ आज के लिए है।
समय: दोपहर ठीक 1:00 बजे (पहली आरती के साथ)।
प्रारंभ स्थल: श्री सिंहवाहिनी दुर्गा मंदिर, चांदामेटा।
अपने परिवार और मित्रों के साथ सही समय पर नजदीकी मार्ग या चांदामेटा पहुँचें और इस अद्भुत हाइड्रोलिक रथ की डोरी खींचकर पुण्य के भागीदार बनें।
जय जगन्नाथ!