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सम्पूर्ण जानकारी: 17 जुलाई परासिया जगन्नाथ रथ यात्रा की, जानिए रूट, समय और भव्य स्वागत स्थलों की पूरी लिस्ट

Parasia Jagannath Rath Yatra full information

परासिया (छिंदवाड़ा): कोयलांचल क्षेत्र में इतिहास रचने जा रही परासिया जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra Parasia 2026) के लिए अब कुछ ही घंटों का समय शेष है। नगर का बच्चा-बच्चा, युवा और बुजुर्ग महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलदेव और बहन सुभद्रा महारानी के स्वागत के लिए पलकें बिछाए तैयार हैं। यदि आप भी इस भव्य उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं और अपने घर या दुकान के सबसे नजदीकी स्थान पर भगवान के दर्शन करना चाहते हैं। यहाँ रथ यात्रा के समय, पूरे रूट और स्वागत स्थलों की पूरी और सटीक जानकारी दी गई है।

रथ यात्रा का समय और भव्य मार्ग (Route & Timing Guide)

भगवान का रथ कब और कहाँ से होकर गुजरेगा, इसे ध्यान से नोट कर लें:

दिन और दिनांक: 17 जुलाई 2026, शुक्रवार

समय: दोपहर 1:00 बजे से (रथ खींचने का शुभारंभ)

यात्रा का भव्य मार्ग: यह ऐतिहासिक रथ यात्रा चांदामेटा के प्रसिद्ध श्री सिंहवाहिनी दुर्गा मंदिर से महा-आरती के साथ प्रारंभ होगी। इसके बाद मंगली बाज़ार, साईं मंदिर, जी.एम. ऑफिस, अंबेडकर चौराहा, गुरुद्वारा और बस स्टैंड होते हुए चौकी मोहल्ला हनुमान मंदिर से घूमकर श्री शिव मंदिर, परासिया पर समाप्त होगी।

राम मंदिर में विशेष पूजा और महाप्रसाद (भंडारे) की तैयारियाँ

पर्दे के पीछे की तैयारियों की बात करें तो ‘भारत की वाणी’ और इस्कॉन की वालंटियर टीम दिन-रात जुटी हुई है। राम मंदिर के विशाल हॉल की पूरी तरह से साफ-सफाई कर दी गई है, जहाँ भगवान जगन्नाथ जी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की जाएगी। इसके साथ ही, यात्रा के दौरान और समापन पर बटने वाले बूंदी के महाप्रसाद को बनाने, उसे शुद्धता से पैक करने के कार्य में नगर के सैकड़ों उत्साहित युवा पूरी श्रद्धा के साथ लगे हुए हैं। यात्रा के समापन स्थल श्री शिव मंदिर पर भगवान की महापूजा, एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशाल भंडारे (महाप्रसाद वितरण) का आयोजन होगा।

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कदम-कदम पर महाप्रभु का स्वागत: स्वागत स्थलों की पूरी सूची

परासिया और चांदामेटा के इतिहास में पहली बार हो रहे इस आयोजन के स्वागत में पूरा शहर उमड़ पड़ा है। आप अपने नजदीकी चौराहे या मोड़ पर जाकर भगवान के रथ की डोरी खींच सकते हैं। स्वागत समितियों और स्थानों की सूची इस प्रकार है:

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एक विशेष नोट: इसके अलावा भी यदि नगर का कोई व्यक्ति, परिवार, व्यापारी या सामाजिक समूह अपनी स्वेच्छा से मार्ग में कहीं भी भगवान का स्वागत, आरती या शीतल जल सेवा करना चाहता है, तो वह पूरी श्रद्धा के साथ आगे आकर जुड़ सकता है! भगवान जगन्नाथ का यह उत्सव पूरे परासिया का उत्सव है।

‘भारत की वाणी’ की अपील

इस ऐतिहासिक और अलौकिक आयोजन को सुगम और अनुशासित बनाने के लिए ‘भारत की वाणी’ के वालंटियर्स पूरे रूट पर इस्कॉन टीम के साथ तैनात रहेंगे। हमारा आपसे अनुरोध है कि 17 जुलाई को दोपहर 1:00 बजे अपने पूरे परिवार और बच्चों के साथ चांदामेटा या अपने नजदीकी स्वागत स्थल पर ज़रूर पहुँचें और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनें।

जय जगन्नाथ!

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